मंगलवार, 4 सितंबर 2012

जब तुम्हारी याद आयी..


आज अचानक
तुम्हारी याद आई
मेरे कानों ने तुम्हारे गीत सुने
मेरी आँखे भर आयी
सोचा
बादलों से कुछ गुफ्तगू कर लूं
तुम्हारे लिए लेकिन
वो भी औरों की तरह
मुझ पर ही बरस पड़ा
मैं मरता क्या न करता
चुपचाप खड़ा भीगता रहा
और वो
बरसता रहा...
बरसता रहा....
बरसता रहा......

1 टिप्पणी:

  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

मेरी रचनाओं पर आपके द्वारा दिए गए प्रतिक्रिया स्वरुप एक-एक शब्द के लिए आप सबों को तहे दिल से शुक्रिया ...उपस्थिति बनायें रखें ...आभार