मंगलवार, 4 सितंबर 2012

गज़ल


मेरे आँखों में आँसू भर आए
जब हीना लगी तेरे हाथों में

किसने जाना कल क्या होगा
कुछ कमी रही जज्बातों में

काँप गए रूह तक भी मेरे
जब महावर लगी तेरे पाँवों में

बिखरा पड़ा था टूटकर मैं
जब सज आयी बारात तेरे गाँव में

भटकता रहा गली-गली पंकज’
जब सुकून ना मिला तेरी छाँव में

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