गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

कुछ हाईकु


और कितनी
गुड़िया तोड़ेगा तू
मासूम भोली 
मासूम बच्ची
दो हज़ार में ले लो
इंसानियत सस्ती ...
जीना छोड़ दूं
कोई उम्मीद नहीं
लौटेगा कोई -
मौन रही तू
तो मैं भी कुछ कहाँ
कह सका था 
जलाओ मुझे
अबला समझ के
चुप रहूंगी
 
हकीकत है
पाक हुआ नापाक
काले इरादे

 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आज के हालात पर बेहतरीन हाइकू....

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  2. गहरा अर्थ लिए ... सामयिक .. सटीक हाइकू ...

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  3. सामयिक और सार्थक हायकू .. साधुवाद .. कृपया २ नंबर वाला एक बार देख ले :)

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  4. आपकी यह पोस्ट आज के (०८ अगस्त, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - श्री भीष्म साहनी से चलो मिल जाएँ पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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मेरी रचनाओं पर आपके द्वारा दिए गए प्रतिक्रिया स्वरुप एक-एक शब्द के लिए आप सबों को तहे दिल से शुक्रिया ...उपस्थिति बनायें रखें ...आभार