शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

वसंत


तेरा आना भी अखरता है
तेरा जाना भी अखरता है

डूबा हूँ किसी की याद में
अब याद सताना अखरता है

जब  उभरती है पुरानी यादें जेहन में
तब खुद पे रोना अखरता है

भर दिए तूने फूलों से गुलशन
तेरा खुद पे इतराना अखरता है

घमंड  है तुझे बसंती बयारों पर
मुझे लोगों का सिहरना अखरता है

बहुत  कह लिया  बहुत सुन लिया
अब तेरा  नाम लेना भी अखरता है ...









सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

.......तो सही.......



कुछ लोग तो फिर भी जिन्दा हैं अभी
कभी हमारे शहर आइये तो सही

हर तरफ शोर चारों ओर हाहाकार है
कभी आप भी शोर मचाइए तो सही

सुर्ख़ियों में है हमारे शहर की लड़कियां
आप भी कुछ ऐसी खबर सुनाइए तो सही

आँख नाक कान सब बंद कर चुके हैं
आप भी गाँधी के बंदर बनाइये तो सही

कुंभ कुंभ सब महाकुंभ महिमा अपरंपार है
आप भगदड़ का मुद्दा उठाइए तो सही

पोल खोलती यह बाजारवाद की हर पल
पल भर के लिए आप पधारिये तो सही

उनकी हंसी है की रूकती नहीं अब तक
आप बस एक बार मुस्कुराइए तो सही.......|